गुडग़ांव किसी व्यक्ति के सही होने की पहचान उसकी जाति-रंग, संख्या बल या उससे होने वाली भीड़ नहीं, अपितु उसके सद्गुण होते हैं। यदि अपराध मुक्त समाज की स्थापना करनी है तो व्यक्ति को स्वयं पाप मुक्त भी होना होगा। उक्त उद्गार तपोवन हरिद्वार के गीता ज्ञानेश्वर डा. स्वामी दिव्यानंद महाराज भिक्षु ने श्री गीता जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में धार्मिक संस्था श्रीगीता साधना सेवा समिति द्वारा ज्योति पार्क स्थित श्री गीता आश्रम में आयोजित 3 दिवसीय श्रीमदभागवत गीता प्रवचन, मोटिवेशन एवं मेडिटेशन महोत्सव में प्रवचन करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कैसी बिडंबना है जेल में पड़ा अपराधी तो चुनाव लड़ सकता है पर एक कैदी वोट नहीं दे सकता? महाराज जी का कहना है कि श्रीमदभागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश आज की होने वाली केवल कथाओं के सुनने जैसा नहीं है। इतने वर्षों से नित्य कथा प्रवचन हो रहे हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण भी है, फिर भी आज जातिवाद के नाम पर झगड़े एक दूसरे का शोषण धर्म मजहब के नाम पर महायुद्ध – गृहयुद्ध हो रहे हैं? नाम-जाति और धर्म पूछकर जिंदा जला दिया जाता है?
यदि इस प्रकार की मानसिकता है जो मानवता से कोसों दूर हैं तो कैसी पूजा और कैसी बंदगी? उनका कहना है कि महत्वपूर्ण है गीता जी का यह सिद्धांत जिसमें क्वालिटी के आधार पर आदमी को देवता-मानव और असुर कहा। जातियों के नाम पर इंसान को बांटने वालों ने इंसानियत को एक प्रकार से समाप्त ही कर दिया है।
