मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से ब्रिटिश कोलंबिया प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, साझा विकास पर बनी सहमति
चंडीगढ़,
हरियाणा और कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के बीच आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के प्रीमियर श्री डेविड एबी के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक में दोनों प्रांतों के बीच साझा विकास को साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
बैठक के दौरान क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, एग्री-फूड प्रोसेसिंग, स्किल डेवलपमेंट और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य–प्रांत स्तर का सहयोग भारत–कनाडा संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश कोलंबिया क्लीन टेक्नोलॉजी, पर्यावरण-अनुकूल नीतियों और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी है, जबकि हरियाणा भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल है। दोनों की क्षमताएँ परस्पर पूरक हैं, जिससे निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हरियाणा और कनाडा के बीच वर्तमान में लगभग 280 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हो रहा है, जो निरंतर बढ़ रहा है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी सेवाओं और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने ब्रिटिश कोलंबिया के माध्यम से हरियाणा के निर्यात को कनाडा तक और विस्तार देने की संभावना जताई।
क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट एक्शन को लेकर हरियाणा की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज और ऊर्जा-कुशल औद्योगिक प्रक्रियाओं में सहयोग का आह्वान किया। इसके साथ ही डिजिटल और आईटी क्षेत्र में एआई आधारित समाधान, स्टार्टअप सहयोग और रिसर्च संस्थानों के बीच साझेदारी पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट और शिक्षा हरियाणा की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रमों से दोनों प्रांतों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। बैठक के अंत में उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान कर शीघ्र ही एमओयू या लेटर ऑफ इंटेंट जैसे औपचारिक समझौतों की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
